सरकार और Zomato की साझेदारी: हर साल 2.5 लाख गिग जॉब्स का वादा

भारत में रोजगार और आर्थिक विकास को नई दिशा देने के लिए सरकार ने Zomato के साथ एक ऐतिहासिक करार किया है, जिससे हर साल लाखों युवाओं के लिए गिग नौकरियों के नए द्वार खुलने वाले है। डिजिटल युग में जहां रोजगार के स्वरूप बदल रहे हैं, वहीं यह साझेदारी देश के बेरोजगारों, युवाओं और महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक व लचीले काम के अवसर सुनिश्चित करने की तरफ बड़ा कदम है।

NCS पोर्टल के जरिए रोजगार का यह नया मॉडल न सिर्फ प्लेटफॉर्म वर्कर्स को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ रहा है, बल्कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प को भी मजबूत बना रहा है। इस सौदे का उद्देश्य राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) पोर्टल के ज़रिए हर साल लगभग 2.5 लाख नई गिग नौकरियां पैदा करना है।​ इस विस्तृत आर्टिकल में जानिए इस सौदे की पूरी जानकारी, इसके मायने, प्रक्रिया और आम नागरिक के लिए इसके फायदों के बारे में।

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क्या है गिग इकोनॉमी?

गिग इकोनॉमी का मतलब एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था से है जहां स्थायी नौकरियों के बजाय अल्पकालिक, लचीली और फ्रीलांस कामों का जिक्र होता है। इसमें कंपनियां फुल-टाइम कर्मचारियों की जगह स्वतंत्र ठेकेदारों, पार्ट-टाइम वर्कर्स या फ्रीलांसरों को विशिष्ट कार्य, प्रोजेक्ट्स या सेवाओं के लिए नियुक्त करती हैं। उदाहरण के लिए, फूड डिलीवरी (Zomato, Swiggy), टैक्सी सेवाएं (Uber, Ola), वेब डेवेलपमेंट, कंटेंट राइटिंग या ऐड डिज़ाइन जैसी नौकरियां गिग इकोनॉमी के दायरे में आती हैं.

इस प्रणाली में अधिकांश काम ऐप्स या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए मिलता है, जिससे वर्कर्स जहां चाहें, जितना चाहें, काम कर सकते हैं। गिग जॉब्स की सबसे बड़ी खासियत है लचीलापन, जिसमें व्यक्ति अपने समय व काम का चुनाव खुद कर सकता है।

भारत में गिग इकोनॉमी का तेजी से विस्तार हो रहा है। अनुमानित तौर पर यह सेक्टर आने वाले सालों में गैर-कृषि क्षेत्रों में 9 करोड़ नौकरियों के अवसर पैदा कर सकता है। युवाओं, महिलाओं, छात्रों और रिटायर्ड प्रोफेशनल्स के लिए यह एक बेहतरीन रोजगार विकल्प बन गया है, जो नियमित वेतन और टार्गेट-आधारित कमाई के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है.

हालांकि, इस क्षेत्र में आय की अनिश्चितता, सामाजिक सुरक्षा की कमी और फायदा देने वाली पॉलिसियों के अभाव जैसी परेशानियां भी हैं। यही कारण है कि सरकार अब गिग इकोनॉमी वर्कर्स को सुरक्षित, संरक्षित और औपचारिक रोजगार प्रणाली से जोड़ने की दिशा में पहल कर रही है.

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MoU की मुख्य बातें

MoU की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • तारीख: यह समझौता 14 अक्टूबर 2025 को साइन हुआ।
  • पहल: इस समझौते के तहत National Career Service (NCS) पोर्टल पर Zomato के साथ मिलकर जॉब्स की लिस्टिंग होगी, जिससे बेरोजगार उम्मीदवार सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
  • रोजगार का प्रकार: ये नौकरी लचीली और तकनीक-समर्थ आजीविका के रूप में होंगी, जिनमें प्राथमिकता उन लोगों को दी जाएगी जो पार्ट-टाइम या शॉर्ट टर्म काम करना चाहते हैं।
  • लक्ष्य: इसका उद्देश्य है हर साल लगभग 5 लाख नई जॉब्स पैदा करना, खासतौर पर गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए।

यह समझौता सरकार की ओर से गिग अर्थव्यवस्था को औपचारिक रोजगार से जोड़ने का बड़ा कदम है, जो युवाओं और महिलाओं को सम्मानजनक, सुरक्षित और डिजिटल तरीके से काम के अवसर प्रदान करेगा।

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सरकार का उद्देश्य और बयान

केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बताया है कि राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) पोर्टल युवाओं को औपचारिक और तकनीक-समर्थ रोजगार से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। यह पोर्टल 2015 में शुरू हुआ था और अब तक इसपर 7.7 करोड़ से अधिक नौकरियों की लिस्टिंग हो चुकी है। NCS पोर्टल नौकरी चाहने वालों को पूरे भारत में सरकारी और निजी क्षेत्रों की बेहतर जॉब्स की जानकारी प्रदान करता है।

यहां वे रोजगार मेला, करियर कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं, करियर काउंसलिंग और कौशल विकास के संसाधन भी प्राप्त कर सकते हैं। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म रोजगार के अवसरों को सुलभ, पारदर्शी और त्वरित बनाता है, जिससे युवाओं को बेहतर आजीविका के रास्ते मिलते हैं। इसका उद्देश्य युवाओं की रोजगार योग्यता बढ़ाना और उन्हें सही नौकरी से जोड़ना है।​

Zomato की भूमिका

इस समझौते पर 14 अक्टूबर 2025 को साइन हुआ, जिसमें श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने बताया कि यह पहल गिग इकॉनमी के कामगारों को औपचारिक और संरक्षित रोजगार प्रणाली से जोड़ने का महत्वपूर्ण कदम है। NCS पोर्टल, जो 2015 में शुरू हुआ, अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नौकरी चाहने वालों के लिए एक प्रमुख प्लेटफॉर्म बन चुका है, यहाँ तक पहुंचकर लाखों लोग रोजगार के अवसर पाते हैं। Zomato की यह पहल मंत्रालय के लिए लचीली और तकनीक आधारित आजीविकाओं को बढ़ावा देने के प्रयासों में एक नया मील का पत्थर साबित होगी।

नई एग्रीगेटर श्रेणी के तहत, Zomato एनसीएस पोर्टल पर हर साल लगभग 2.5 लाख फ्लेक्सिबल जॉब्स की सूची बनाएगा, जो डिलीवरी पार्टनर्स व अन्य गिग वर्कर्स के लिए बेहतर और अधिक संरचित अवसर उपलब्ध कराएगा। इससे केवल रोजगार के अवसर ही नहीं बढ़ेंगे, बल्कि यह साझेदारी रोजगार प्रणाली को अधिक औपचारिक, सुरक्षित और समावेशी बनाने में भी मदद करेगी। इससे उन वर्गों को भी फायदा होगा जो पारंपरिक नौकरियों से दूर हैं या जिन्हें अस्थाई और लचीले काम की तलाश है। इस कदम से सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा युवा, महिलाएं और तकनीक से जुड़े लोग रोजगार के अवसरों से जुड़ें और देश के आर्थिक विकास में सक्रिय भागीदार बनें।

सामाजिक सुरक्षा और समावेश

श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे के अनुसार, इस करार का लक्ष्य केवल नए रोजगार के अवसर पैदा करना नहीं है, बल्कि गिग वर्कर्स को भविष्य में स्थायी औपचारिकता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना भी है। इसका मतलब है कि जो लोग गिग इकोनॉमी में काम कर रहे हैं, उन्हें लंबे समय तक काम करने का अधिकार, नियमित आय, बीमा, पेंशन, स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे अधिकार मिलें और वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। इसके जरिए गिग वर्कर्स के काम की अहमियत को सरकारी मान्यता मिलेगी और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

यह पहल प्रधानमंत्री विकासशील भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत आई है, जो बेरोजगारी कम करने और युवाओं को रोजगार के स्थायी अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार की बड़ी योजना है। इसके साथ ही यह भारत के ‘विकसित भारत 2047’ विज़न को साकार करने में एक मील का पत्थर है, जो देश को आर्थिक रूप से मजबूत, सामाजिक रूप से सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

इस योजना से गिग इकोनॉमी के अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोगों को बेहतर सुविधा, सम्मान और सुरक्षा मिलेगी जिससे वे अपने रोजगार और जीवन स्तर को मजबूत कर सकेंगे। इसका मकसद देश के समग्र आर्थिक विकास को गति देना तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

क्या बदलेगा आम व्यक्ति के लिए?

नौजवान, महिलाएं, छात्र और जो लचीले समय में काम करना चाहते हैं, उन्हें अब सम्मानजनक और सुरक्षित जॉब्स मिलने में आसानी होगी। इसके लिए नौकरी चयन और ट्रेनिंग की प्रक्रिया ज्यादा बेहतर और पूरी तरह डिजिटल होगी, जिससे आवेदन करना, चयनित होना और प्रशिक्षण लेना आसान हो जाएगा। राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) पोर्टल पर अपडेट रहकर कोई भी व्यक्ति नए रोजगार के अवसरों की जानकारी तुरंत पा सकता है और समय पर आवेदन कर सकता है। इसका मतलब यह है कि अब रोजगार की प्रक्रिया पारदर्शी, तेज और सरल बन गई है, जिससे अधिक लोग अपने लिए उपयुक्त नौकरी हासिल कर सकेंगे। यह सभी वर्गों के, खासकर गिग वर्कर्स के लिए फायदे का सौदा होगा।

Zomato/ ब्लिंकिट, नाम परिवर्तन और कंपनी विस्तार

Zomato ने अपना नाम स्टॉक एक्सचेंजों पर ‘इटरनल लिमिटेड’ कर दिया है, लेकिन ऐप का नाम ‘Zomato ही बरकरार रहेगा। कंपनी की सेवाओं में डिलीवरी के साथ-साथ ब्लिंकिट (किराना), डिस्ट्रिक्ट और हाइपरप्योर जैसे कई नए सेवा-विंडो शामिल हो गए हैं। ब्लिंकिट, जो Zomato की क्विक कॉमर्स शाखा है, अभी अपनी पहचान एक स्वतंत्र ब्रांड के रूप में बनाए हुए है और Zomato ऐप के माध्यम से इसे अलग टैब के रूप में भी एक्सेस किया जा सकता है। इस विस्तार से Zomato अपने व्यवसाय को फूड डिलीवरी से बढ़ाकर किराना और जैसे क्षेत्रों तक फैला रहा है, जिससे उपयोगकर्ताओं को और अधिक सुविधाएं मिलेंगी तथा कंपनी की बाजार में क्षमता और पहुंच बढ़ेगी।

निष्कर्ष

भारत सरकार और Zomato की समझौता साझेदारी गिग अर्थव्यवस्था को औपचारिक रोजगार प्रणाली से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल करीब 2.5 लाख युवाओं को हर वर्ष लचीले, सम्मानजनक और डिजिटल माध्यमों से सुलभ रोजगार प्रस्तावित करती है। Zomato का नाम अब स्टॉक एक्सचेंजों में इटरनल लिमिटेड हो गया है, जो कंपनी के व्यवसाय विस्तार और नई सेवा शाखाओं जैसे ब्लिंकिट, डिस्ट्रिक्ट और हाइपरप्योर को दर्शाता है। यह बदलाव केवल नाम का नहीं बल्कि कंपनी के मिशन और भविष्य की दिशा का प्रतिबिंब है।

NCS पोर्टल के माध्यम से चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनाकर रोजगार की पहुँच को व्यापक और सुरक्षित बनाया जा रहा है, जिससे युवाओं, महिलाओं और अन्य वर्गों को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। इस समझौते से भारत का गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा और औपचारिकता मिलना सुनिश्चित होगा, जो प्रधानमंत्री विकासशील भारत रोजगार योजना और विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है। कुल मिलाकर, यह पहल रोजगार के नए युग की शुरुआत और भारत के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी।

Disclaimer:

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