क्या आपने सुना कि Nepal में बड़ा सियासी तूफान आया है? नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने 9 सितंबर 2025 को इस्तीफा दे दिया। भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवाओं का गुस्सा इतना बढ़ा कि सरकार को झुकना पड़ा। इस आंदोलन में 19 लोगों की जान चली गई। Nepal PM Resign के बाद से देश अब अनिश्चितता के दौर में है। अगर आप जानना चाहते हैं कि ये सब क्यों हुआ? इसका भारत पर क्या असर होगा? और आप कैसे सुरक्षित रह सकते हैं?
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नेपाल में क्या हुआ? आंदोलन की पूरी कहानी
Nepal PM Resign का संकट अचानक से नहीं आया। के.पी. शर्मा ओली जो नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता हैं वह जुलाई 2024 में चौथी बार प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन केपी शर्मा ओली के सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और नेपोटिज्म के गंभीर आरोप लगे। 8 सितंबर 2025 को ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया। बैन लगाने का बहाना था कि ये कंपनियां नए रजिस्ट्रेशन नियमों का पालन नहीं कर रही थीं। लेकिन युवाओं ने सोशल मीडिया बैन को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला माना।
Nepal सरकार के सोशल मीडिया को बैन करने से जनरेशन Z(GenZ) के युवा सड़कों पर उतर करके भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लगाए। काठमांडू में भ्र्ष्टाचार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने रबर बुलेट्स और असली गोलियां चलाईं। जिसके परिणाम स्वरूप कम से कम 19 लोग मारे गए और 150 से ज्यादा घायल हुए। नेपाल का दशकों में सबसे हिंसक आंदोलन था।
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Nepal के PM ने इस्तीफा क्यों दिया?
9 सितंबर की सुबह सरकार ने सोशल मीडिया पर से बैन हटा लिया। लेकिन जनता का गुस्सा सोशल मीडिया पर बैन हटाने पर भी ठंडा नहीं हुआ। वह कर्फ्यू तोड़कर सड़कों पर आए और संसद भवन में घुस गए। उन्होंने संसद को आग लगा दी। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहाल के घरों पर भी प्रदर्शनकारियों ने हमले किए। सरकारी गाड़ियां जलाई गईं और हालात बेकाबू हो गए।
होम मिनिस्टर रमेश लेखक और एग्रीकल्चर मिनिस्टर रामनाथ अधिकारी और हेल्थ मिनिस्टर प्रदीप पौडेल समेत कई मंत्रियों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया। Nepal के पीएम ओली पर दबाव इतना बढ़ा कि उन्होंने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को पत्र लिखकर इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा “देश की खराब स्थिति को देखते हुए मैं इस्तीफा दे रहा हूं।” उनके सहायक प्रकाश सिलवाल ने इसे कन्फर्म किया। सेना चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल ने भी ओली से कुर्सी छोड़ने को कहा था।
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आंदोलन की जड़ें: भ्रष्टाचार और युवाओं का गुस्सा
इस आंदोलन की जड़ें काफी गहरी हैं। नेपाल में 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद से ही राजनीतिक अस्थिरता रही है। ओली सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप थे। मंत्रियों और उनके बच्चों की शानदार जिंदगी को सोशल मीडिया पर हाइलाइट किया गया। जिससे जनता में गुस्सा भड़का। युवा रेडिट और इंस्टाग्राम पर वायरल पोस्ट्स शेयर कर रहे थे।
उनकी मांगें साफ थीं ओली का इस्तीफा, भ्रष्ट नेताओं पर कार्रवाई और अभिव्यक्ति की आजादी और नेताओं के लिए रिटायरमेंट उम्र तय करना। नेपाल में 48.1% आबादी (लगभग 1.43 करोड़ लोग) सोशल मीडिया यूज करती है जो युवाओं की ताकत को दिखाता है। नेपाली कांग्रेस के नेता गगन थापा ने भी ओली से इस्तीफा मांगा और कहा लोगों की आवाज दबाने की जिम्मेदारी लें। देश की बड़ी अखबारों ने भी संपादकीय में यही बात कही।
इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा?
Nepal भारत का करीबी पड़ोसी है। नेपाल की अस्थिरता का असर भारत पर भी पड़ सकता है। नेपाल के लाखों मजदूर भारत में काम करते हैं। नेपाल और भारत का सीमा पार व्यापार भी होता है। भारत ने अपने नागरिकों को नेपाल में सतर्क रहने की सलाह दी है। एयर इंडिया ने काठमांडू की फ्लाइट्स कैंसल कर दीं। नेपाल की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है।
Nepal में बेरोजगारी ज्यादा है और साथ मे महंगाई भी बढ़ रही है। अगर यह संकट बढ़ा तो सीमा पार माइग्रेशन और व्यापार प्रभावित हो सकता है। लेकिन सकारात्मक पक्ष यह है कि यह आंदोलन लोकतंत्र को मजबूत कर सकता है। नेपाली कांग्रेस गठबंधन तोड़ने की बात कर रही है। जिससे जल्दी चुनाव या नेशनल गवर्नमेंट बनने की संभावना है।
भारत के नागरिक यदि नेपाल में है तो उनके सुरक्षित रहने के लिए प्रैक्टिकल टिप्स
- खबरें चेक करें: विश्वसनीय स्रोत जैसे रॉयटर्स, बीबीसी, स्पेशल प्राइम न्यूज और द हिंदू से अपडेट्स लें। फेक न्यूज से बचें।
- सुरक्षा: काठमांडू में कर्फ्यू का पालन करें और घर से बाहर न निकलें।
- यात्रा: नेपाल की यात्रा टालें। फ्लाइट्स और रोड कंडीशंस चेक करें।
- संपर्क: भारतीय दूतावास (फोन: +97714410900) से संपर्क करे।
- निवेश: बिजनेस या निवेश में सावधानी बरतें क्योंकि इस संकट से अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
- शांतिपूर्ण समर्थन: वोटिंग और शांतिपूर्ण विरोध से बदलाव लाएं।
Nepal का भविष्य: अब क्या होगा?
केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद Nepal में अनिश्चितता बढ़ गई है। राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल नए प्रधानमंत्री चुनने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। राष्ट्रपति के पास प्रधानमंत्री चुनने को दो प्रक्रिया है पहला संसद भंग करके नया चुनाव कराए दूसरा नया गठबंधन की पार्टी को सरकार बनाने के लिए ऑफर दे । सेना और सिविल सर्विस ने नेपाल के युवाओं से शांति की अपील की है। नेपाल के इतिहास में ऐसे आंदोलन पहले भी बदलाव लाए हैं जैसे 2008 में राजशाही का अंत। लेकिन हिंसा से बचना जरूरी है। युवाओं की आवाज ने दिखाया कि सोशल मीडिया और एकता कितनी ताकतवर हो सकती है।
निष्कर्ष
Nepal के पीएम के.पी. शर्मा ओली का इस्तीफा 2025 भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं की जीत है। 19 मौतों और हिंसा के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। लेकिन देश को शांति चाहिए। हमने आपको इस संकट की पूरी कहानी, भारत पर असर और सुरक्षित रहने के टिप्स बताए। अब देखना होगा कि Nepal में अगली सरकार कौन बनाता है। अगर आप Nepal से हैं तो सतर्क रहें और विश्वसनीय खबरों पर भरोसा करें। यह घटना हमें सिखाती है कि जनता की आवाज लोकतंत्र का आधार है।
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Nepal पीएम इस्तीफा 2025 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- नेपाल के पीएम ओली ने इस्तीफा क्यों दिया?
ओली ने भ्रष्टाचार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के कारण इस्तीफा दिया। जिसमें 19 लोगों की मौत हुई।
- नेपाल में प्रदर्शन कब और क्यों शुरू हुए?
प्रदर्शन 8 सितंबर 2025 को सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुए जो भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर केंद्रित हो गए। Gen Z युवाओं ने नेतृत्व किया।
- नेपाल के पीएम ओली के इस्तीफे के बाद क्या हुआ?
इस्तीफे के बाद संसद भवन में आग लगा दी गई। कर्फ्यू लगा और एयरपोर्ट बंद हो गया और राष्ट्रपति नए पीएम चुनने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।
- नेपाल के प्रदर्शनों में कितने लोग मारे गए?
प्रदर्शनों में कम से कम 19 से 22 लोग मारे गए और 300 से ज्यादा घायल हुए। पुलिस की गोलीबारी से हिंसा बढ़ी।
- नेपाल संकट का भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी। एयर इंडिया की फ्लाइट्स कैंसल, सीमा व्यापार प्रभावित हो सकता है।