Avadhut Sathe Case: शेयर बाजार की दुनिया में खुद को ‘मार्केट गुरु’ बताने वाले और हजारों छात्रों को ट्रेडिंग सिखाने वाले अवधूत साठे (Avdhut Sathe) पर अब तक की सबसे बड़ी गाज गिरी है। मार्केट रेगुलेटर SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने एक कड़े फैसले में अवधूत साठे और उनकी कंपनी पर शेयर बाजार में कारोबार करने से रोक लगा दी है। सिर्फ इतना ही नहीं, सेबी ने लगभग 546 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम को जब्त करने का आदेश दिया है।
यह खबर उन लाखों लोगों के लिए एक चेतावनी है जो सोशल मीडिया या यूट्यूब पर ‘फिनफ्लूएंसर्स’ (Finfluencers) की बातों में आकर अपनी गाढ़ी कमाई निवेश कर देते हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और आखिर क्यों सेबी को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा।
Avadhut Sathe Case: क्या है पूरा मामला?
SEBI ने अपनी जांच में पाया कि अवधूत साठे ट्रेडिंग एकेडमी (ASTAPL) शेयर बाजार की शिक्षा (Education) देने की आड़ में गैर-कानूनी इनवेस्टमेंट एडवाइजरी (Unregistered Investment Advisory) चला रही थी।
सेबी के नियमों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति या संस्था को स्टॉक टिप्स, ट्रेडिंग कॉल्स या निवेश की सलाह देने के लिए SEBI के पास रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है। लेकिन अवधूत साठे बिना किसी रजिस्ट्रेशन के अपने छात्रों को “सीखने” के नाम पर सीधे तौर पर यह बता रहे थे कि कौन सा शेयर खरीदना है और कौन सा बेचना है।
546 करोड़ रुपये का खेल: ‘फीस’ या ‘धोखा’?
Avdhut Sathe Case पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 546.17 करोड़ रुपये का है। सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि साठे और उनकी कंपनी ने “अनधिकृत निवेश सलाह” देकर यह पैसा कमाया है।
महंगे कोर्सेज: अवधूत साठे के कोर्सेज की फीस लाखों में थी। सेबी का मानना है कि लोग इतनी भारी फीस ‘शिक्षा’ के लिए नहीं, बल्कि उन ‘ट्रेडिंग कॉल्स’ और ‘मुनाफे के लालच’ के लिए दे रहे थे, जिसका वादा किया जाता था।
पैसे लौटाने का आदेश: सेबी ने आदेश दिया है कि गैर-कानूनी तरीके से कमाए गए इन 546 करोड़ रुपये को 15 दिनों के भीतर एक एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) में जमा कराया जाए। साथ ही, साठे और उनके निदेशकों को अपनी संपत्ति बेचने पर भी रोक लगा दी गई है।
शिक्षा की आड़ में चल रहा था ‘टिप्स’ का धंधा
सेबी की जांच में यह खुलासा हुआ कि अवधूत साठे के काम करने का तरीका बहुत चालाकी भरा था:
लुभावने वादे: उनके विज्ञापनों और सेमिनारों में शेयर बाजार से जल्दी अमीर बनने और “गारंटीड रिटर्न” (Guaranteed Returns) जैसे सपने दिखाए जाते थे, जो कि नियमों के खिलाफ है।
लाइव ट्रेडिंग के नाम पर सलाह: ‘मेंटरशिप’ प्रोग्राम के तहत, छात्रों को लाइव मार्केट में बताया जाता था कि कब एंट्री लेनी है और कब एग्जिट करना है। यह सीधे तौर पर इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी की श्रेणी में आता है, जिसके लिए उनके पास लाइसेंस नहीं था।
जोखिम को छुपाना: शेयर बाजार में जोखिम होता है, लेकिन साठे के कोर्सेज में इसे बहुत आसान और सुरक्षित बताया जाता था, जिससे नए निवेशक फंस जाते थे।
Finfluencers पर SEBI का अब तक का सबसे बड़ा वार
पिछले कुछ समय से सेबी सोशल मीडिया पर सक्रिय ‘फिनफ्लूएंसर्स’ (Financial Influencers) पर नकेल कस रहा है। इससे पहले ‘बाप ऑफ चार्ट’ (Baap of Chart) और अन्य कई यूट्यूबर्स पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन अवधूत साठे पर की गई यह कार्रवाई राशि के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
सेबी का संदेश साफ है: “अगर आप फाइनेंस के बारे में सिखाना चाहते हैं, तो सिखाएं। लेकिन अगर आप टिप्स देकर लोगों से पैसा कमा रहे हैं, तो आपको रजिस्टर्ड होना होगा।”
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Avadhut Sathe Case: निवेशकों के लिए सबक
यह घटना हर उस व्यक्ति के लिए एक सबक है जो शेयर बाजार में नए हैं।
- ब्लाइंड ट्रस्ट न करें: किसी भी यूट्यूबर या इंस्टाग्राम गुरु पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, चाहे उसके कितने भी फॉलोअर्स क्यों न हों।
- रजिस्ट्रेशन चेक करें: किसी की सलाह पर पैसा लगाने से पहले चेक करें कि क्या वह व्यक्ति SEBI Registered Investment Advisor (RIA) है या नहीं।
- गारंटीड रिटर्न एक धोक है: शेयर बाजार में कोई भी “निश्चित मुनाफे” की गारंटी नहीं दे सकता। अगर कोई ऐसा दावा कर रहा है, तो समझ लीजिए कि कुछ गड़बड़ है।
निष्कर्ष
Avadhut Sathe Case पर लगा यह बैन और 546 करोड़ की वसूली का आदेश भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़ा मोड़ है। यह कार्रवाई साबित करती है कि सेबी अब आम निवेशकों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। अब देखना यह होगा कि साठे इस आदेश के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं, लेकिन फिलहाल के लिए उनकी ट्रेडिंग एकेडमी पर बड़ा ताला लटक गया है।
क्या आपको लगता है कि आजकल सोशल मीडिया पर ‘स्टॉक मार्केट गुरुओं’ की बाढ़ आ गई है? क्या सरकार को इन पर और सख्त नियम बनाने चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
Disclaimer:
यह खबर मीडिया रिपोर्ट्स और SEBI के आदेश पर आधारित है। यह लेख केवल जानकारी के लिए है, हम कोई वित्तीय सलाहकार नहीं हैं। Sources: The Lallantop Moneycontrol Hindi