SEBI vs Avadhut Sathe: भारत में बीते कुछ वर्षों में फिनफ्लुएंसर इंडस्ट्री ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। लाखों लोग सोशल मीडिया और ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से शेयर बाजार सीख रहे हैं। Avadhut Sathe इस दौर के उन्हीं नामों में से एक थे, जिनका प्रभाव डिजिटल वित्तीय शिक्षा के क्षेत्र में काफी बड़ा माना जाता था। लेकिन दिसंबर 2025 में SEBI द्वारा उन पर की गई सख्त कार्रवाई ने पूरे उद्योग को हिला दिया है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है -बल्कि यह भारतीय निवेशक सुरक्षा, मार्केट रेगुलेशन और ऑनलाइन वित्तीय शिक्षा के भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है।
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Avadhut Sathe कौन हैं?
Avadhut Sathe एक लोकप्रिय ट्रेडिंग मेंटर और फिनफ्लुएंसर हैं, जिन्होंने वर्षों तक YouTube, Instagram और लाइव ट्रेडिंग सेशन के माध्यम से बड़ा दर्शक वर्ग तैयार किया है। वे अपने प्राइस-एक्शन आधारित ट्रेडिंग मॉडल और मोटिवेशनल अंदाज़ के लिए जाने जाते थे। उनकी Academy- Avadhut Sathe Trading Academy Pvt Ltd (ASTAPL) -दावा करती थी कि वह लोगों को प्रोफेशनल ट्रेडर बनने के लिए प्रशिक्षित करती है।
SEBI के आंकड़ों के अनुसार, 2017 से 2025 के बीच लगभग 3.4 लाख लोगों ने Avadhut Sathe के कोर्स या सेशन अटेंड किए, जिससे कंपनी को लगभग 601 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। इस लोकप्रियता और बड़े पैमाने पर जुड़ाव ने ही अंततः SEBI का ध्यान आकर्षित किया।
SEBI की जांच कैसे शुरू हुई?
SEBI को समय-समय पर कई शिकायतें मिलीं कि ASTAPL और Sathe न केवल ट्रेडिंग सिखा रहे हैं बल्कि सीधे-सीधे निवेश सलाह, स्टॉक कॉल और ट्रेडिंग सिग्नल भी दे रहे थे। इन शिकायतों में आरोप था कि Sathe लाइव ट्रेडिंग सत्रों में स्टॉक्स के एंट्री-प्राइस, स्टॉप-लॉस और टारगेट तक बताते हैं, जो किसी भी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार के बिना करना कानूनन गलत है।
मार्च 2024 में SEBI ने उन्हें पहली चेतावनी दी थी, लेकिन जांच रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपनी गतिविधियाँ उसी रूप में जारी रखीं। इसके बाद SEBI ने व्यापक जांच शुरू की, जिसमें उनकी कमाई, गतिविधियाँ, कोर्स सामग्री और निवेशकों की प्रतिक्रियाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
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SEBI को जांच में क्या मिला?
SEBI के आदेश में बताया गया कि ASTAPL ने शिक्षा के नाम पर वास्तव में निवेश सलाह देने का काम किया। उनकी लाइव ट्रेनिंग सेशन्स और प्रोग्राम्स में स्टॉक्स की सटीक खरीद-बिक्री की जानकारी, एंट्री-एक्ज़िट पॉइंट्स और मार्केट ट्रेंड्स का दिशा-निर्देश शामिल था। यह सभी गतिविधियाँ “Investment Advisory” की श्रेणी में आती हैं, जिसके लिए SEBI से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने लगभग 601 करोड़ रुपये कमाए, जिनमें से 546 करोड़ रुपये को SEBI ने “गैरकानूनी कमाई” माना। SEBI ने यह भी कहा कि उनके कंटेंट और वर्कशॉप्स में ऐसा भाव था कि लोग तेजी से कमाई की उम्मीद में कोर्स खरीद रहे थे, जिससे यह गतिविधि और भी संवेदनशील हो जाती है।
SEBI ने Avadhut Sathe पर क्या कार्रवाई की?
SEBI ने 4 दिसंबर 2025 को एक बड़ा आदेश जारी करते हुए Avadhut Sathe और उनकी कंपनी को सिक्योरिटीज मार्केट से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। इसके तहत वे न तो निवेश सलाह दे सकते हैं, न ही किसी ट्रेडिंग कॉल या स्टॉक-एनालिसिस गतिविधि में शामिल हो सकते हैं। SEBI ने उनके और संबंधित बैंक खातों से लगभग 546 करोड़ रुपये तक की राशि जब्त करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई फिनफ्लुएंसर उद्योग में अपनी तरह की सबसे कड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिसमें किसी व्यक्ति या संस्था को इतने बड़े पैमाने पर बाजार से प्रतिबंधित किया गया हो।
निवेशकों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस आदेश से उन लाखों लोगों पर सीधा असर पड़ा है जिन्होंने Sathe के कोर्स या लाइव ट्रेडिंग कार्यक्रमों में भारी फीस दी थी। अब निवेशक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उनकी फीस का कोई हिस्सा वापस मिल सकता है। SEBI का कहना है कि जब्ती प्रक्रिया का उद्देश्य गैरकानूनी कमाई को वापस लाना है, लेकिन रिफंड की प्रक्रिया आगे अदालतों और SAT (Securities Appellate Tribunal) द्वारा तय की जाएगी।
निवेशकों के लिए यह मामला एक बड़ी सीख भी है कि केवल लोकप्रियता या सोशल मीडिया फॉलोइंग के आधार पर किसी वित्तीय सलाह पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
फिनफ्लुएंसर इंडस्ट्री के लिए बड़ा संदेश
भारत में डिजिटल वित्तीय शिक्षा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ गलत सूचनाओं और अनियमित सलाह का भी फैलाव बढ़ा है। Avadhut Sathe पर हुई कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि SEBI अब ऐसे सभी फिनफ्लुएंसर्स पर सख्त नजर रखेगा जो बिना पंजीकरण के बाजार से जुड़े सुझाव देते हैं। यह मामला संकेत देता है कि भविष्य में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्टॉक सिग्नल, टेलीग्राम चैनल्स और पेड ट्रेडिंग ग्रुप्स पर भी नियमन कड़ा होगा। इसका उद्देश्य है कि सामान्य निवेशकों को भ्रामक या अवैध सलाह से बचाया जा सके।
क्या यह मामला और आगे बढ़ेगा?
यह काफी संभव है कि Avadhut Sathe और उनकी कंपनी SEBI के इस आदेश को SAT या उच्च न्यायालय में चुनौती दें। यदि ऐसा होता है, तो मामला लंबा चल सकता है और अंतिम निर्णय आने में महीनों या वर्षों का समय लग सकता है। रिफंड प्रक्रिया, जब्ती की कानूनी वैधता और निवेशकों के दावों जैसी कई बातें अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए यह मामला फिलहाल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आने वाले समय में इसमें कई नए मोड़ देखने को मिल सकते हैं।
निष्कर्ष
Avadhut Sathe का मामला भारतीय फिनफ्लुएंसर परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। यह बताता है कि वित्तीय सलाह और वित्तीय शिक्षा में स्पष्ट अंतर है, और यह अंतर कानून द्वारा निर्धारित किया गया है। निवेशकों को हमेशा रजिस्टर्ड और मान्यता प्राप्त सलाहकारों से ही सुझाव लेने चाहिए। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और फिनफ्लुएंसर्स को भी यह समझना होगा कि बड़ी फॉलोइंग और लोकप्रियता उन्हें नियामकीय जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं करती।
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डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सूचना और विश्लेषण के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई सामग्री किसी भी प्रकार की वित्तीय सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
Sources: India Today The Hindu The Economic Times