Dollar to INR 2025: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 90 के पार लुढ़क गया है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। 2-3 दिसंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपया डॉलर रेट 90.14 से 90.36 तक पहुंच गया, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ गया। यह गिरावट विदेशी निवेशकों के पलायन और वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं का नतीजा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को नई चुनौतियां दे रही है।
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Dollar to INR: रेट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले हमेशा उतार-चढ़ाव का शिकार रहा है, लेकिन 90 का आंकड़ा ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। 2025 में अब तक रुपया डॉलर रेट में करीब 4.4% की कुल गिरावट दर्ज हुई है, जो पिछले साल की तुलना में दोगुनी तेज है। 1991 के आर्थिक संकट के बाद ऐसा दबाव नहीं देखा गया, जब रुपया 20 से 45 रुपये प्रति डॉलर तक गिरा था। आज रुपया डॉलर रेट 90.17-90.36 के दायरे में स्थिर होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी है।
पिछले 30 दिनों में Dollar to INR रेट का औसत 89.02 रुपये रहा, जो न्यूनतम 88.46 और अधिकतम 90.35 तक रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डॉलर बिक्री कर रुपये को समर्थन देने की कोशिश की, लेकिन वैश्विक कारकों ने इसे नाकाम कर दिया। यह स्थिति 2025 की शुरुआत से चली आ रही है, जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों ने उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया।
Dollar to INR: गिरावट के प्रमुख कारण
रुपया डॉलर रेट में तेज गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफपीआई) का भारत से पलायन है, जिन्होंने अरबों डॉलर निकाल लिए। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर अनिश्चितता ने निवेशकों का भरोसा डिगाया, खासकर राष्ट्रपति ट्रंप के नए प्रशासन के बाद।
जापानी येन कैरी ट्रेड का अनवाइंडिंग: निवेशक कम ब्याज वाली येन से उधार लेकर डॉलर में निवेश कर रहे थे, लेकिन अब इसे उलट रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ।
आयात बिल बढ़ना: तेल और सोने जैसे आयातित सामानों की मांग से डॉलर की खरीदारी बढ़ी।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती: फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों से डॉलर इंडेक्स 108 के पार पहुंचा।
भारतीय निर्यातकों को इससे फायदा तो हो रहा है, लेकिन कुल मिलाकर व्यापार घाटा बढ़ा है। आरबीआई ने विदेशी मुद्रा भंडार से हस्तक्षेप किया, लेकिन यह सीमित प्रभाव डाल सका।
आम आदमी पर Dollar to INR रेट बढ़ने का असर
Dollar to INR रेट के 90 पार जाने से रोजमर्रा की जिंदगी महंगी हो गई है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें 5-10 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकती हैं, क्योंकि भारत 85% कच्चा तेल आयात करता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और लैपटॉप जैसे सामान 10-15% महंगे हो जाएंगे।
विदेश यात्रा: अमेरिका या यूरोप जाने का खर्च 20% बढ़ेगा, जिससे पर्यटन उद्योग प्रभावित।
शिक्षा और स्वास्थ्य: विदेशी यूनिवर्सिटी फीस और दवाओं की कीमतें आसमान छूएंगी।
महंगाई: खाद्य तेल और अन्य आयातित वस्तुओं से खुदरा महंगाई 6% पार कर सकती है।
मध्यम वर्ग परिवारों पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ेगा, जबकि निर्यात आधारित उद्योगों जैसे आईटी और टेक्सटाइल को राहत मिलेगी। सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है।
सरकार और आरबीआई की प्रतिक्रिया
आरबीआई ने Dollar to INR रेट को स्थिर करने के लिए 1.5 अरब डॉलर की बिक्री की, लेकिन भंडार अब 650 अरब डॉलर पर है। वित्त मंत्री ने संसद में कहा कि वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं, और घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत है। जीडीपी ग्रोथ 7% रहने की उम्मीद है।
भविष्य में क्या होगा? विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया डॉलर रेट 92 तक जा सकता है अगर एफपीआई बहिर्वाह जारी रहा। सरकार विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नए सुधार ला रही है, जैसे पीएलआई स्कीम का विस्तार। लंबे समय में निर्यात बढ़ाकर संतुलन बनाना होगा।
Dollar to INR रेट स्थिर करने के उपाय
रुपया डॉलर रेट को मजबूत करने के लिए कुछ व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं:
- निर्यात प्रोत्साहन: टेक्सटाइल और फार्मा को सब्सिडी देकर डॉलर कमाएं।
- विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना: आरबीआई स्वैप लाइन्स का इस्तेमाल करे।
- मुद्रास्फीति नियंत्रण: ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई रोके।
व्यक्तिगत स्तर पर, डॉलर में बचत या हेजिंग फंड्स पर विचार करें। स्टॉक मार्केट में डॉलर-हेज्ड फंड चुनें।
विश्व संदर्भ में भारत की स्थिति
वैश्विक स्तर पर रुपया डॉलर रेट की तुलना में तुर्की लीरा और ब्राजील रियाल भी कमजोर हैं, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत है। चीन युआन को नियंत्रित रखे हुए है। अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी से उभरते बाजार प्रभावित हो रहे हैं। भारत को डिजिटल निर्यात और रेमिटेंस पर निर्भरता घटानी होगी।
निष्कर्ष:
Dollar to INR रेट के 90 पार जाने से अल्पकालिक चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन मजबूत घरेलू नीतियों से सुधार संभव है। निवेशक सतर्क रहें और लंबी अवधि के अवसर तलाशें। यह संकट अवसर भी ला सकता है अगर सही कदम उठाए जाएं।
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डिस्क्लेमर:
यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए है। वित्तीय निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह लें। डेटा 4 दिसंबर 2025 तक के समाचार स्रोतों पर आधारित।
Sources: NDTV India Times Amar Ujala